Thursday, 4 October 2012

महिला सशक्तीकरण के लिए जरूरी है-वित्तीय साक्षरता

तमाम विरोधभास के बावजूद हमारे देश में एक ओर तो यह सच है कि महिलायें परिवार की धुरी होती हैं तथा भले ही कमाई पुरूष वर्ग करता है। लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि अगर महिलायें नौकरी पेशा और कमाऊ हैं तब भी उनकी आय का सारा हिसाब पुरूष ही रखते है। महिलायें अपनी सारी कमाई अपने पति के हाथों में सौंप देती है, एटीएम के युग में पत्नियों के एटीएम कार्ड का पासवर्ड भी सिर्फ पति महोदय को ज्ञात रहता है। कुल मिलाकर यह भी सच है कि हमारे देश में महिलायें अपनी कमाई का भी मनमाफिक उपयोग नहीं कर सकती है। उनकी भुमिका पारिवारिक व्यय के लिए सिर्फ सूचना प्रदाता तक ही सीमित है और आर्थिक मामलों पर निर्णय की बात सिर्फ उनकी सलाह तक ही सीमित है। इस संदर्भ में पुरूष वर्ग यह  तर्क देता है कि महिलाओं में न तो वित्तीय मामलों की समझ होती हैं और न ही वो इसकी अधिकारी है। इस तरह महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बीच अब भी आर्थिक मुद्दों पर पूर्ण रूप से पुरूष वर्ग का ही वर्चस्व है। ऐसें में अगर महिलायें परिवार के खर्चों का हिसाब रखने की भूमिका से संतुष्ट हैं तो यह उनके सशक्तीकरण के मुद्दे को भी कमजोर करता है तथा परिवार और समाज के लिए भी नुकसानदायक है। क्योंकि आज परिवारिक मामलों में महिलाओं की भूमिका बढ़ने से यह जरूरी है कि वो पारिवारिक आर्थिक मामलों की भी समझ विकसित करें। मसलन वो आय व्यय में संतुलन के लिए पारिवारिक बजट बनाने के साथ साथ बचत और निवेश की जरूरतों को भी समझें। एक अच्छा बजट परिवार को आने वाले आर्थिक संकट से सुरक्षित रखता है।
महिलायें पारिवारिक जरूरतों पर मुद्रास्फीति और मंहगाई के प्रभाव को भी समझे, महिलायें पारिवारिक खर्च पर काफी हद तक नियंत्रण कर सकती हैं जैसे बिजली, फोन अनाज और उपयोगिता से जुड़े तथ्यों का अध्ययन कर इन पर होने वाले अपव्यय को रोक सकती है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि उन्हें पारिवारिक और पति की संपति संबंधी अधिकार के संबंध में कानूनी प्रावधानों की जानकारी हो। नामिनी और संरक्षक सम्पति संबंधी अधिकार का ज्ञान होना चाहिए। महिलाओं को बैंकिंग और बचत के तमाम साधनों की जानकारी भी होना चाहिए जो कि उन्हें नहीं रहती है। यह जरूरी है कि महिलाओं को पति की आय और व्यय का पूरा पूरा ज्ञान हो साथ साथ यह भी जरूरी हैं कि पति के द्वारा किए गए निवेश, बैंक खातों, जमा और उधारी का भी ज्ञान होना चाहिए। क्योंकि किसी अनहोनी वश पति के साथ कोई हादसा हो जाए तो महिला को आर्थिक मामलों संबंधी किसी प्रकार की कानूनी समस्या से परेशानी न हो। पति द्वारा परित्याग और तलाक के मामलों में भी महिलाओं को आर्थिक मामलों में काफी परेशानी और अपमान झेलना पड़ता है अगर महिलाओं को इनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों का ज्ञान हो तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा सकता है। वृद्वावस्था महिलाओं को काफी कष्टप्रद होती है क्योंकि उनके उपर होने वाले व्यय से उनके बच्चे भी कन्नी काटते हैं इसके लिए जरूरी है कि उन्हे बीमा और पेंशंन योजनाओं का ज्ञान कराया जाए।
आज जिस तरह महिलाओं की भूमिका समाज और व्यवसाय के क्षेत्रों में बढ़ी है उस हिसाब से वो बच्चों के जन्म तथा उनकी शिक्षा दीक्षा के लिए आर्थिक सुदृढ़ता पर विचार करने लगी हैं यह महिला सशक्तीकरण की राह में शुभ संदेश है। लेकिन महिला सशक्ती करण की  यह बात महिलाओं को वित्तीय साक्षर करने से ही पूरी होगी। तथा पारिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी महिलाओं को वित्तीय साक्षर करने की जरूरत है क्योंकि वो होम मेकर यानि घर चलाने वाली है। क्योंकि यह बात सच है कि चाहे ग्रामीण निरक्षर महिला हो या फिर आधुनिक सीईओ महिला। सबको कही न कहीं वित्तीय साक्षरता की जरूरत हैं क्योंकि कामकाजी महिलाओं को बजट और बचत का उर्पयुक्त ज्ञान ही नहीं हैं। तथा ग्रामीण महिलायें वित्त के मामलों में लगभग पराधीन होती हैं और उनकी न तो कोई राय होती है लेकिन वो पारिवारिक बचत तथा आयवृद्वि में अहम रोल अदा कर सकती है इसके लिए उन्हें स्व सहायता समूहों से जोड़कर स्वावलम्बन के कार्यक्रम से जोड़कर और बैंकिग  की जानकारी, पोस्ट आफिस बचत तथा पारिवारिक सम्पति संबंधी अधिकारो से सशक्त किया जा सकता हैं। इसके लिए ग्रामीण महिलाओं के लिए पंचायत या स्वसहायता समूह की बैठकों के दौरान वित्तीय साक्षरता का ज्ञान दिया जा सकता है।
हमारे देश में इस संदर्भ में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड(सेबी) ने अपने वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता का संदेश पहुंचाया है इसके लिए सेबी ने स्वसहायता समूह से जुड़ें महिला समूहों को साथ लिया हैं,तथा समाज के विभिन्न समूहों से जूड़ी महिलाओं के लिए फायनेंसियल लिटरेसी फार होम मेकर्स के नाम से कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। उड़ीसा में मिशन शक्ति के नाम से महिलाओं को वित्तीय रूप साक्षर करने का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। वैश्विक स्तर पर भी वित्तीय साक्षरता के जरिये महिला सशक्तीकरण के कार्यक्रम चलाए जा रहें है। अमेरिका और कनाडा के साथ साथ केन्या और घाना जैसे देशों में महिलाओं को पारिवारिक बजट के साथ बचत के तरीकों, बैंकिग सुविधाओं के उपयोग की जानकारी तथा पेंशन संबंधी योजनाओं से अवगत कराया जाता हैं। विकसित देशों के साथ घाना जैसे देश ने नेटवर्क आफ यंग वूमेन के नाम से युवा लड़कियों के बीच वित्तीय साक्षरता के कार्यक्रम चलाए है।
वास्तव में महिलाओं को सशक्त करने के लिए जरूरी हैं कि उन्हें स्कूल और कालेज स्तर पर वित्तीय साक्षरता के कार्यक्रम से जोड़ा जाए। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के बीच कार्य करने वाले संगठनों और स्वयं सेवी संगठनों को इस कार्य से जोड़ा जाए। शहरी क्षेत्र में भी कामकाजी महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता से जूड़े कार्यक्रमों को अनिवार्य किया जाए। (हम समवेत)

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