Friday, 29 June 2012

कब तक अपमान सहन करू ?

तमाम विरोधभास के बावजूद हमारे देश में एक ओर तो यह सच है कि महिलायें परिवार की धुरी होती हैं तथा भले ही कमाई पुरूष वर्ग करता है। लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि अगर महिलायें नौकरी पेशा और कमाऊ हैं तब भी उनकी आय का सारा हिसाब पुरूष ही रखते है। महिलायें अपनी सारी कमाई अपने पति के हाथों में सौंप देती है, एटीएम के युग में पत्नियों के एटीएम कार्ड का पासवर्ड भी सिर्फ पति महोदय को ज्ञात रहता है। कुल मिलाकर यह भी सच है कि हमारे देश में महिलायें अपनी कमाई का भी मनमाफिक उपयोग नहीं कर सकती है। उनकी भुमिका पारिवारिक व्यय के लिए सिर्फ सूचना प्रदाता तक ही सीमित है और आर्थिक मामलों पर निर्णय की बात सिर्फ उनकी सलाह तक ही सीमित है। इस संदर्भ में पुरूष वर्ग यह  तर्क देता है कि महिलाओं में न तो वित्तीय मामलों की समझ होती हैं और न ही वो इसकी अधिकारी है। इस तरह महिला सशक्तीकरण के तमाम दावों के बीच अब भी आर्थिक मुद्दों पर पूर्ण रूप से पुरूष वर्ग का ही वर्चस्व है। ऐसें में अगर महिलायें परिवार के खर्चों का हिसाब रखने की भूमिका से संतुष्ट हैं तो यह उनके सशक्तीकरण के मुद्दे को भी कमजोर करता है तथा परिवार और समाज के लिए भी नुकसानदायक है। क्योंकि आज परिवारिक मामलों में महिलाओं की भूमिका बढ़ने से यह जरूरी है कि वो पारिवारिक आर्थिक मामलों की भी समझ विकसित करें। मसलन वो आय व्यय में संतुलन के लिए पारिवारिक बजट बनाने के साथ साथ बचत और निवेश की जरूरतों को भी समझें। एक अच्छा बजट परिवार को आने वाले आर्थिक संकट से सुरक्षित रखता है।
महिलायें पारिवारिक जरूरतों पर मुद्रास्फीति और मंहगाई के प्रभाव को भी समझे, महिलायें पारिवारिक खर्च पर काफी हद तक नियंत्रण कर सकती हैं जैसे बिजली, फोन अनाज और उपयोगिता से जुड़े तथ्यों का अध्ययन कर इन पर होने वाले अपव्यय को रोक सकती है। महिलाओं के लिए जरूरी है कि उन्हें पारिवारिक और पति की संपति संबंधी अधिकार के संबंध में कानूनी प्रावधानों की जानकारी हो। नामिनी और संरक्षक सम्पति संबंधी अधिकार का ज्ञान होना चाहिए। महिलाओं को बैंकिंग और बचत के तमाम साधनों की जानकारी भी होना चाहिए जो कि उन्हें नहीं रहती है। यह जरूरी है कि महिलाओं को पति की आय और व्यय का पूरा पूरा ज्ञान हो साथ साथ यह भी जरूरी हैं कि पति के द्वारा किए गए निवेश, बैंक खातों, जमा और उधारी का भी ज्ञान होना चाहिए। क्योंकि किसी अनहोनी वश पति के साथ कोई हादसा हो जाए तो महिला को आर्थिक मामलों संबंधी किसी प्रकार की कानूनी समस्या से परेशानी न हो। पति द्वारा परित्याग और तलाक के मामलों में भी महिलाओं को आर्थिक मामलों में काफी परेशानी और अपमान झेलना पड़ता है अगर महिलाओं को इनसे संबंधित कानूनी प्रावधानों का ज्ञान हो तो इस प्रकार की समस्याओं से बचा सकता है। वृद्वावस्था महिलाओं को काफी कष्टप्रद होती है क्योंकि उनके उपर होने वाले व्यय से उनके बच्चे भी कन्नी काटते हैं इसके लिए जरूरी है कि उन्हे बीमा और पेंशंन योजनाओं का ज्ञान कराया जाए।
आज जिस तरह महिलाओं की भूमिका समाज और व्यवसाय के क्षेत्रों में बढ़ी है उस हिसाब से वो बच्चों के जन्म तथा उनकी शिक्षा दीक्षा के लिए आर्थिक सुदृढ़ता पर विचार करने लगी हैं यह महिला सशक्तीकरण की राह में शुभ संदेश है। लेकिन महिला सशक्ती करण की  यह बात महिलाओं को वित्तीय साक्षर करने से ही पूरी होगी। तथा पारिवार की आर्थिक सुरक्षा के लिए भी महिलाओं को वित्तीय साक्षर करने की जरूरत है क्योंकि वो होम मेकर यानि घर चलाने वाली है। क्योंकि यह बात सच है कि चाहे ग्रामीण निरक्षर महिला हो या फिर आधुनिक सीईओ महिला। सबको कही न कहीं वित्तीय साक्षरता की जरूरत हैं क्योंकि कामकाजी महिलाओं को बजट और बचत का उर्पयुक्त ज्ञान ही नहीं हैं। तथा ग्रामीण महिलायें वित्त के मामलों में लगभग पराधीन होती हैं और उनकी न तो कोई राय होती है लेकिन वो पारिवारिक बचत तथा आयवृद्वि में अहम रोल अदा कर सकती है इसके लिए उन्हें स्व सहायता समूहों से जोड़कर स्वावलम्बन के कार्यक्रम से जोड़कर और बैंकिग  की जानकारी, पोस्ट आफिस बचत तथा पारिवारिक सम्पति संबंधी अधिकारो से सशक्त किया जा सकता हैं। इसके लिए ग्रामीण महिलाओं के लिए पंचायत या स्वसहायता समूह की बैठकों के दौरान वित्तीय साक्षरता का ज्ञान दिया जा सकता है।
हमारे देश में इस संदर्भ में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड(सेबी) ने अपने वित्तीय साक्षरता कार्यक्रम के जरिए ग्रामीण महिलाओं में वित्तीय साक्षरता का संदेश पहुंचाया है इसके लिए सेबी ने स्वसहायता समूह से जुड़ें महिला समूहों को साथ लिया हैं,तथा समाज के विभिन्न समूहों से जूड़ी महिलाओं के लिए फायनेंसियल लिटरेसी फार होम मेकर्स के नाम से कार्यक्रम प्रारम्भ किया है। उड़ीसा में मिशन शक्ति के नाम से महिलाओं को वित्तीय रूप साक्षर करने का कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है। वैश्विक स्तर पर भी वित्तीय साक्षरता के जरिये महिला सशक्तीकरण के कार्यक्रम चलाए जा रहें है। अमेरिका और कनाडा के साथ साथ केन्या और घाना जैसे देशों में महिलाओं को पारिवारिक बजट के साथ बचत के तरीकों, बैंकिग सुविधाओं के उपयोग की जानकारी तथा पेंशन संबंधी योजनाओं से अवगत कराया जाता हैं। विकसित देशों के साथ घाना जैसे देश ने नेटवर्क आफ यंग वूमेन के नाम से युवा लड़कियों के बीच वित्तीय साक्षरता के कार्यक्रम चलाए है।
वास्तव में महिलाओं को सशक्त करने के लिए जरूरी हैं कि उन्हें स्कूल और कालेज स्तर पर वित्तीय साक्षरता के कार्यक्रम से जोड़ा जाए। ग्रामीण क्षेत्र में महिलाओं के बीच कार्य करने वाले संगठनों और स्वयं सेवी संगठनों को इस कार्य से जोड़ा जाए। शहरी क्षेत्र में भी कामकाजी महिलाओं के बीच वित्तीय जागरूकता से जूड़े कार्यक्रमों को अनिवार्य किया जाए।

मुस्लिम शराब नहीं पीते है.?

मुस्लिम अक्सर बहुत ही गर्व से छाती फुला कर बोलते रहते हैं कि..... इस्लाम में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित है... और, कोई भी मुस्लिम शराब नहीं पीता है...!

लेकिन... आप यह जानकर हैरान रह जायेंगे कि.... ये एक बहुत ही चालाकी से फैलाया गया झूठ है... और, हकीकत इसके बिलकुल ही विपरीत है...!

मुस्लिम तो मुस्लिम..... इस्लाम के प्रतिपादक और तथाकथित रूप से अल्लाह के भूत.... सॉरी... दूत.... मुहम्मद साहब ना सिर्फ शराब पीते थे.... बल्कि वे तो शौचालय से आने के बाद शराब से ही वजू तक करते थे.....!

ये बातें मैं कोई मनगढ़ंत तौर पर नहीं कह रहा हूँ.... बल्कि अपनी कमअक्ली के कारण मुहम्मद साहब ने खुद अपने कुरान में लिख छोड़ी है.... ताकि हम जैसे लोग उसे पढ़ कर मुस्लिमों के झूठ का भांडा फोड़ सकें...!

लीजिये.... आप भी.... कुरान की वो सम्बंधित आयतें पढ़े....... और, मुहम्मद साहब से सम्बंधित अपने सामान्य ज्ञान में वृद्धि करें....

१. जाबिर बिन अब्दुल्ला ने कहा कि..... रसूल ने मुझ से कुछ चीज पीने के लिए लाने को कहा... मैंने पूछा कि ..."क्या मैं आपके लिए "नबीज़ (शराब) दूँ....?

रसूल ने कहा .....हाँ वही लाओ.

थोड़ी देर बाद जब मैं नबीज़ (शराब) एक बर्तन में लेकर आया तो रसूल ने पूछा कि जबीर क्या तुमने बर्तन को पत्तों और टहनियों से ठीक से ढक कर लाये हो (ताकि किसी को पता न चले)

मैंने कहा......... हाँ मैं छुपा कर लाया हूँ......... यह सुन कर रसूल ने बर्तन लेकर नबीज (शराब) पी ली. ..............मुस्लिम -किताब 1 हदीस 3753.

2 -मुहम्मद ने शराब से वजू किया ----

अब्दुल्लाह बिन मसूद ने कहा कि........वह रसूल के पास था ......रसूल ने वजू के लिए पानी का बर्तन लाने को कहा मैंने कहा कि बर्तन में तो शराब रखी है.

रसूल ने कहा कि तुम वही बर्तन लाओ ....मुझे वजू करना है .

फिर रसूल बोले ........ ऐ अब्दुल्ला बिन मसूद , शराब तो एक पेय है जो सिर्फ शुद्ध करती है .....फिर रसूल ने उसी से वजू किया .... -Musnad Ahmad - Hadith #3594.

3 -रसूल के लिए शराब बनती थी ---

इब्ने अब्बास ने कहा कि रसूल के लिए "नबीज़ "बनाई जाती थी ..... जिसे ऊंट के छाडे की कुप्पी में भरकर रात को रसूल के घर भेज दिया जाता था .

रसूल सोमवार की रात से मंगल की दोपहर तक शराब पीते थे .अगर बच जाती थी .तो गुलामों को दे देते थे .या लुढ़का देते थे ..... सही मुस्लिम -किताब 23 हदीस ४९७२ और 4974.

4 -मुहम्मद ने शराब से रोजा खोला ---

अबू हुरैरा ने कहा कि, जब रसूल रोजे में होते थे तो मैं उनका इंतजार करता था कि.... वे रोजा कब खोलें...

और, जब वह रोजे में नही होते थे... तो, मैं उनको नबीज पेश कर देता था.

मैं नबीज तभी देता था जब वह अच्छी तरह से तैयार हो जाती थी.

रसूल कहा करते थे कि यह नबीज उन्हीं लोगों के लिए है जो अल्लाह और आखिरत पर ईमान रखते हैं...... सुन्ननअबू दौउद -किताब 26 हदीस 3707.

### अब लगे हाथ ये भी जान लें कि ... नबिज क्या होता है...

नबीज खजूरों को सडा कर उसमे खमीर उठाकर बनाई गयी तेज शराब होती है अंगरेजी में इसे Wine कहते हैं .

All of the following dictionaries confirm that نبيذ (nabidh) means Wine:

अरबी शब्दकोश لسان العرب लिसानुल अरब में نبيذ नबीज़ का अर्थ الخمر अल खमर यानी शराब है मुहम्मद वही पीता था.

@@@@ उपरोक्त हदीसों को पढने के बाद यह स्पष्ट है कि ...... इस्लाम के प्रतिपादक और कथित रूप से अल्लाह के दूत मुहम्मद साहब ... न सिर्फ शराब पीते थे..... बल्कि शराब में ही डूबे रहते थे....... शायद इसीलिए मुहम्मद साहब ने मुस्लिमों को जन्नत में ""शराब और हूरों ( लड़कियों) का लालच दे रखा है...!

अब...... साथ ही इस्लाम का दोगलापन देखें कि... कुरान के ही सूरा-अल मायदा 5 :90 में शराब पीने को शैतान का काम बताया गया है ..!

तो क्या मुस्लिम...... अपने पियक्कड़ रसूल अर्थात मुहम्मद को ""शैतान "" मानने को तैयार हैं....?????

इसीलिए..... इन हदीसों के बाद .... अब, या तो मुस्लिम ये कबूल करें कि....... या तो उनका रसूल एक शैतान है क्योंकि वो शराब पीता था..... या फिर कबूल करें कि.... इस्लाम में शराब प्रतिबंधित नहीं है...!


नोट: ये लेख किसी प्रकार की दुर्भावना से नहीं लिखा गया है .... बल्कि सभी को सभी धर्मों की जानकारी देने के पवित्र उद्देश्य से लिखी गयी है...!

यदि किसी सज्जन अथवा दुर्जन को इस लेख से कोई आपत्ति हो तो ..... वो मुझसे और सबूत मांग सकता/ सकती है..