Wednesday, 17 October 2012

दहेज़ और भारतीय महिलाए

आजकल देश के हर राज्य में दहेज़ के मामले तेज़ी से बढ़ रहे है कुछ दहेज़ लोभियों ने सभी लड़के के पक्ष वालो को संदेह के घेरे में ला दिया है लड़की वाले बहुत ही डर -डर कर अपनी लड़की का रिश्ता करते है .कई बार सुनने और देखने में आता है की ससुराल पक्ष वालो ने बाइक या गैह्नो की खातिर बहु को जला दिया या जहर दे दिया .कई बार बात मार -पिटाई ,गाली – गलोच तक सिमित रहती है …..ताकि लड़की के माँ बाप लड़के वालो को धन या फिर जो उनकी डिमांड होती है देने के लिए मजबूर हो जाए .दहेज़ लेना और देना अपराध है एसा हमें सकूलो में पढाया गया है फिर भी कई लोग दहेज़ लेते है और महिलाओं को दहेज़ के लिए प्रताड़ित करते है .ऐसे में दहेज़ मांगने वाले ,या कहे तंग करने वाले अपने ससुराल पक्ष के लोगो के खिलाफ कुछ महिलाए केस दर्ज कराती है .जिसके तहत महिला जिन लोगो का नाम दर्ज कराती है उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाता है . किन्तु समाज में ऐसी महिलाओं की भी कमी नहीं है जो इस दहेज़ विरोधी क़ानून का दुरूपयोग पैसे ऐठने या ससुराल पक्ष में अपना दबदबा बनाने के लिए करती है कभी कभी इस तरह के केस में देखने में आता है की कुछ महिलाए बेकसूर ससुराल पक्ष के लोगो को भी जेल में ठुस्वा देती है जिन्होंने कभी दहेज़ की डिमांड की ही नहीं होती इस कानून का प्रयोग कर कई निर्दोष लोग भी चपेट में आ जाते है .कुछ महिलाए पैसे ऐठने के लिए और कुछ महिलाए ससुराल पक्ष के लोगो को बेवजह दबाने के लिए भी एसा कदम उठती है .जिसकी वजह से निर्दोष लोगो पर भी चार -चार साल केस चलता रहता है और लड़के वालो को आर्थिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है .चार -पांच सालो तक कोर्ट में केस चलने की वजह से लड़के का और कही रिश्ता भी नही किया जा सकता .इस कारण लड़के की उम्र भी काफी हो जाती है और उसे लगातार समाज में परेशानियों का सामना करना पड़ता है .सवाल उठता है हमारे भारत में आजकल महिला उत्पीडन के नाम पर महिलाओं के लिए जिस तरह के कानून बनाये जा रहे है क्या इस तरह के क़ानून भारत में नारी की छवि को बिगाड नहीं रहे है ?क्या इस तरह के क़ानून का दुरूपयोग करने से पुरूष और ओरत में खाई चोडी हो रही है ?क्या इस तरह के क़ानून बनाने से भारतीय समाज का परिवारक ढांचा बर्बाद नही हो रहा है ?
क्या इस तरह के कानून की आड़ में किसी निर्दोष परिवार को फ़साना जायज है ?सवाल उठता है की क्या – हर- बार लड़के वाले ही दोषी होते है और जो शब्द , जो ब्यान कोई महिला — पुलिस -थाने में दर्ज करवा दे वही “पत्थर की ‘लकीर की तरह सच है ?बेशक से वह महिला या फिर उसके घरवाले इस तरह के क़ानून का उपयोग लड़के वालो को परेशान करना पैसो के लिए कई सालो से करते आ रहे हो . क्या सिर्फ इसलिए नारी की हर बात को सच मान लिया जाए की वह एक महिला है और उसे भारत में कई तरह के अधिकार मिले है . जो निर्दोष परिवार सालो तक जेल में रहते है उनमे महिलाए भी होती है क्या उनके कुछ अधिकार नहीं है ?क्या पुरूष समाज में भावनाए नहीं होती जो उन्हें ही आँख मीचकर गलत मान लिया जाता है ?
क्या ऐसी महिलाओं या उनके खिलाफ कोई सख्त दंड का प्रावधान हमारे समाज या फिर क़ानून में नहीं होना चाहिए जो निर्दोष लोगो को बेवजह तंग करती है ?

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