कुछ दिन पहले मैं किसी काम से अवधेश प्रताप सिंह बिश्वबिध्यालय रीवा (मध्यप्रदेश) गई थी। वहां से काम निपटा कर लौट ही रही थी कि तभी कुछ लड़कों का ग्रुप मेरे पास से निकला जिनकी बातचीत का विषय लड़कियां थीं। बातचीत का विषय लड़कियों की सुन्दरता या उनका बॉयफ्रैंड नहीं था, बल्कि वे लड़कियों के कपड़ों पर फब्तियां कस रहे थे। लड़कियों को सर से पैर तक ढका देखकर कह रहे थे, '"उफ ये सर्दियां भी न! खूबसूरती देखने का मौका ही छीन लेती हैं।"
वैसे! लड़कियां कुछ भी पहनें किन्तु पुरूषों की नज़र उन्हीं पर रहती है। फिर वे कहते-फिरते हैं कि लड़कियों के कपड़े हमें उनकी ओर आकर्षित करते हैं। उदाहरण के तौर पर, अभी कुछ समय पहले एक ब्लॉगर ने ऐसी टिप्पणी देते हुए ब्लॉग भी लिखा था। अक्सर लोगों को यही कहते सुना है कि लड़कियों के छोटे कपड़े ही इस तरह की वारदातों का कारण होते हैं। अगर खबरों पर गौर किया जाए तो रेप केस में 5 साल की बच्ची से लेकर अधेड़ उम्र की महिला तक इस तरह की घटनाओं का शिकार बनी है। एक बुरके में रहने वाली औरत को भी रास्ते में कई बार पुरूषों द्वारा छेड़खानी का सामना करना पड़ता है। क्या उस समय भी वह महिला छोटे कपड़ों में होती है?
पश्चिमी सभ्यता को कोसते हुए हमेशा महिलाओं को ही गलत बताकर ऐसी घटनाओं को दबाने की कोशिश की जाती है। आज यदि भारत में पश्चिमी सभ्यता का साया है, तो केवल महिलाएं ही नहीं बल्कि पुरूष भी इसका अनुसरण कर रहे हैं। फिर केवल महिलाओं को ही क्यों दोषी माना जाता है? कुछ समय पहले आंध्र प्रदेश के डीजीपी दिनेश रेड्डी ने कहा था, �महिलाओं के फैशनेबल और पारदर्शी कपड़े पहनने से रेप की घटनाएं बढ़ती हैं।� यहां भी एक तरह से महिलाओं को गलत बताते हुए उन्होंने पुरूषों का ही समर्थन किया। आखिर क्यों पुरूषों की नैतिकता उस समय धराशाही हो जाती है, जब महिलाएं �भड़काऊ� (जैसा कि पुरुष कहते हैं) कपड़े पहनती हैं? जब एक छोटी-सी बच्ची तक को वे अपनी लालसा का शिकार बना लेते हैं तो उस नादान ने कौन से भड़काऊ कपड़े पहने होते हैं, जिसे देखकर वह बेकाबू हो जाते हैं।
भारत एक आजाद देश है। यहां हर व्यक्ति को अपनी इच्छानुसार बोलने, खाने और पहनने का अधिकार है तो क्यों महिलाएं केवल पुरूषों की सोच के लिए अपना पहनावा बदलें! लड़की छोटे कपड़े पहने या बड़े, पुरूषों के सामने से गुजरते वक्त उसे किसी न किसी प्रकार की फब्ती को झेलना पड़ता ही है। पता नहीं लड़कियों के कपड़े ज़्यादा छोटे हैं या हमारे समाज की सोच...!

i want to see you in that dress i don't give any kind of comments
ReplyDeleteसमाज की सोच तो है ही छोटी,,लेकिन औरतों ने भी इस सोच को आग देने में कसर नहीं छोड़ रखी है,,नारी परमात्मा की बनाई एक उत्कृष्ट कृति है,,उसका तन दिखाने की चीज नहीं है..वस्त्र ऐसे पहनिए की आपकी सुन्दरता दिखे,,ना की आपका जिस्म..
ReplyDeleteमहोदया शायद आप ठीक तरह से Analysis नही करती हैं ....वाहा पर अछे से लिखा हैं .. "ज्यादातर" ...वरना बचियो और बूढी औरते के साथ बलात्कार करने वाले मानसिक रोगी या कुछ अलग ही परवर्ती के होते हैं जिनका स्वाभाव और सोच हमेशा जीवन के हर क्षण एक जेसा होता हैं ....औरते के सही पर्विधान से बोहत सारे अपराध रुक सकते हैं ..क्यों की जिस सोच को आप बदलने की बातें करते हो वो सोच भी पहनाव रहन सहन से ही आती हैं .... अछे माहोल में अछी सोच की उपज होती हैं ..... नारी की सुन्दरता नग्नता में नही, उसके गुणों में ...और वही परिभासा पुरुष पर भी लागू होती हैं उसके पुरुषार्थ के साथ. वो काह्वत तो सुनी होगी ..."कामनी के संग काम जागे ही जागे" ...तो सही परिधान न केवल किसी को ऐसे कार्य करने की हिमत को रोकता हैं परन्तु उसके प्रति शायद सम्मान का अंकुर भी फोड़ दे ...
ReplyDelete---Bhupendar Singh Bhati