Tuesday, 10 January 2012

दरिद्र ही नारायण है

आज पीड़ा इस बात क़ी है की ईश्वर ने जब सारे मनुष्यों को एक जैसा ही बनाया है तब समाज के नेतृत्व कर्ता, पिछड़े या दरिद्र वर्ग से क्यों नही निकल रहे ?. उस पूरे वर्ग को, भूख, अशिक्षा और समस्त कमजोरियों से मुक्त करा कर विश्व व्यवस्था को सुधारना यही लक्ष्य होना चाहिए सरकार का ..
पर आज हम सभी जानते थे यह कार्य आसान नही है .. अज्ञान से लड़ने और कमजोरियों पर विजय पाने के लिये भी 'मैन पावर ' और साधनों क़ी जरूरत थी.. वेद और उपनिषद उनके लिये शक्ति प्रदाता है .. गीता में वर्णित सांख्ययोग और कर्मयोग को उनके जीवन आचरण में प्रत्यक्ष देखा जा सकता है.. इसे ही हमें औरों के लिये भी सुझाव देना है .. मान्यता है क़ी हिंदुत्व को धारण किये अपने समाज में, लम्बे समय से सुधार नही किया गया तो अनेक विकृत मान्यताओं और परम्पराओं ने स्थान बना लिया है.. यही हमारी कमजोरी का कारण है..और हम सभी मिलकर इस कमजोरी को दूर करेगे तो आप बताये कौन कौन है मेरे साथ !!

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