आँखों से नीदो को
चुरा लेते है ये लोग
अपने ही मुल्क में ,,,,,,,,,,,,,,,,
नगा नचा देते है लोग ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
सिर्फ ये पक्तिया ही नही है ये हकीकत का एक छोटा सा आइना है जो हमे दिखाताहै की हम आज अपने ही मुल्क में सुरछित नही है हम सब जानते है हमारा देश पुरुष प्रधान देश है तो क्या हमे इसका नाजायज फायदा लेना है ...........
भारतीय नारिया आज पुरुसो से कन्धा से कन्धा मिलाकेचल रही है जो हमे जलन होती है क्या हम सब इतने गिर गये है जो अपने ही मुल्को के माँ बहन की इज्ज़त को सरे आम बेच रहे है .. जिस देश में पुरूसोतम श्री रामचंद जी की संज्ञा दी जाती है उसे तो हमने कब का बेच खाया है हर शक्स के चहरे के पीछे एक फरेअब का चेहरा छिपा होता है जो इंसानियत को त्याग कर हैवानियत का रुख अपनाकर अपनी प्यास बुझाने में लग जाता है हर रोज खबरों में सुनने में आता है बलात्कार ,हत्या ,लूटमार जो आज हम सबके लिए आम बात हो चुकी है लेकिन हमे तो बस अपने घर की फिकर होती है ये मत भूलो की उनका भी अपना एक घर होता है जिसे हम बर्बाद कर देने पे तुले रहते है आज हमरे समाज के लोअग ही इसे दिन दुगनी रात चोग्नी बढ़ावा दे रहे है जो आज हर एक माँ बेटी पैदा ही नही करना चाहती ..... हम ये भूल जाते है की हमने भे किसी माँ के खोक से जनम लिया है ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,, हम अपनी सोच को बदलना होगा औब इंसानियत की पहेचान करनी होगी जो हमारा फर्ज बनता है किसी औरत को जिन्दा जला दिया जाता है तो किसी अबला बेबस नारी के साथ बलात्कार कर दिया जाता है ये आज तो हमारी देश की सुर्खिया हो चुकी है जो आय दिन सुनने में आता है ,,,,,,,,,, ये मत भूलो कल के न्यूज़ की सुर्खिया हमारी माँ बेटी भे हो सकती है जो घिनोना खेल हम दुसरो के साथ खेअल रहे है वो हमरे साथ भी एक दिन खेला जायेगा ...............आप सब से मेरी विनती है की हमे एक जुट होकर उन दरिंदो का खात्मा करना है जो उनकी इज्ज़त को सरेआम बेच रहे है और अमन शांति का परचम लहराना है उन मासूम चेहेरो को याद कर जो अपने बचपन में ही इस हिंसा का सिकार हो गयी उन्ही से जुडी या उन्ही की मुह्जुबानी पंक्तिया लिखा हूँ ........................................
जुल्मो का कोई खोअफ नही ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
जालिम ये दुनिया वाले है
गेरो ने कुछ रहम दिखाया
अपने तो हमे सरेआम नचाया
बचपन मेरे बीत गये
किसी ने मुझको ये बताया
धन दोलत के चकर में
खड़े बाजार मुझे बिकवाया ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
दावा मेरा तुझसे है ये
खेला जो मेरे सन्ग ये खेअल
घर के चोखेट के अंदर तेरे
खेला जायेगा ऐसा ही खेल ,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,,
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